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Panchgavya Therapy

नामांकन से सम्बंधित जानकारी / Admission Information

पंचगव्य चिकित्सा शिक्षा में नामांकन करने के लिए मार्गदर्शन

1) सर्वप्रथम भाषा का चुनाव करें. उसी आधार पर उस प्रदेश के गुरुकुल का चुनाव करें॰ पंचगव्य विद्यापीठम (पंचगव्य गुरूकुलम समूह की इकाई) भारत की सभी राष्ट्रभाषाओं में पंचगव्य चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध करता है.
2) पंचगव्य विद्यापीठम विस्तार का चुनाव करें. कई प्रदेशों में एक से अधिक विस्तार केंद्र हैं. अत: इसे कई आधारों पर चुना जा सकता है. पंचगव्य विद्यापीठम विस्तार
a. आचार्यों के आधार पर. (आचार्यों का विवरण जानने के लिए नीचे लिंक पर जाएँ.) आचार्य
b. संचालकों के आधार पर. (संचालकों का विवरण जानने के लिए नीचे लिंक पर जाएँ.) संचालक

नामांकन कराने के लिए आवेदन अपनी मातृभाषा के साथ – साथ अंगरेजी और हिन्दी में भी भरना आवश्यक है..
1) ऑनलाइन नामांकन कैसे करें?
2) विस्तार केन्द्रों पर जाकर नामांकन कैसे करें.
3) आवेदन पत्र को स्पीड पोस्ट से भेज कर नामांकन कैसे लें.

1) ऑनलाइन नामांकन के लिए नीचे लिंक पर जाएँ. और आवेदन पत्रों को भरें. (अपनी मातृभाषा के साथ – साथ हिंदी / अंगरेजी) का भी पत्र भरें. भरने से पहले भाषा और पंचगव्य विद्यापीठम विस्तार का चुनाव करना अनिवार्य है. पत्र भरते समय पता के अंतर्गत जिला कालम में ऑनलाइन दिए गए लिस्ट से ही अपने जिला का चुनाव करें. इस सम्बन्ध में कोई समस्या होने पर हेल्पलाईन +91(044) 27 28 22 23 (सप्ताह में 6 दिन, सोमवार से शनिवार प्रात: 10 बजे से सायं 6 बजे तक.) पर कॉल किया जा सकता है.

2) विस्तार केन्द्रों पर जा कर भी नामांकन लिया जा सकता है. इसके लिए आपको संचालक से मिलने की आवश्यकता है. उनके पास आवेदन पत्र की हार्डकॉपी होती है. यह विवरण पुस्तिका में भी प्रकाशित है, जहाँ से काट कर लिया जा सकता है. उनके समक्ष भर कर भी नामांकन लिया जा सकता है. लेकिन (शुल्क राशि) देय राशि केवल पंचगव्य विद्यापीठम के खाते में ही भरा जाना चाहिए उसकी पर्ची संचालक / संचालिका को दी जानी चाहिए. खाता का विवरण इस प्रकार है.



3) नीचे दिए गए लिंक पर सभी भाषाओं में नामांकन पत्र दिया गया है जिसे डाउनलोड अथवा प्रिंट किया जा सकता है. इसके साथ (1) आपकी अंतिम शिक्षा की मार्कशीट की स्वहस्ताक्षरित कॉपी. (2) आवास प्रमाण पत्र के लिए इनमें से कोई एक संलग्न करें. (अ) आधार कार्ड की कॉपी (आ) ड्राइविंग लाइसेन्स की कॉपी (इ) वोटर कार्ड की कॉपी (ई) राशन कार्ड की कॉपी (3) जन्म प्रमाण पत्र के लिए 10 वीं. का प्रमाण पत्र अथवा ऊपर में से कोई एक.

किसी भी पाठ्यक्रम को ज्वाइन करने के लिए पंजीकरण शुल्क 5000 रुपये मात्र. जिसे आवेदन के समय जमा करना है. जो विद्यार्थी फार्म भर कर स्पीड पोस्ट से भेजते हैं वे पंजीकरण शुल्क जमा करने की पावती की कॉपी साथ संलग्न करें. तभी आवेदन पत्र स्वीकृत किया जा सकेगा. पंजीकरण शुल्क किसी भी स्थिति में वापस नहीं दी जा सकेगी.

शेष की राशि कक्षा प्रारंभ होने से पूर्व पंचगव्य विद्यापीठम के खाते में जमा कराना आवश्यक है. शेष की राशि को दो बार में पेय की जा सकती है. इसके लिए 1000 रुपये अधिक देना पड़ेगा. आवेदन पत्र मिलने के बाद आपको कक्षा प्रारम्भ होने की जानकारी दूरभाष से दे दी जाएगी। (आवेदन किसी भी कोरिअर से न भेजें. केवल स्पीड पोस्ट से ही भेजें.)

1) बारहवीं पास हों और आयु 18 से अधिक हो.
2) केवल दसवीं पास हो लेकिन आयु 25 से ज्यादा हो.
3) दसवीं से कम शिक्षा लेकिन आयु 30 से अधिक हो.
4) दसवीं/बारहवीं या कम के अंक पत्र (Mark Sheet) की 1 प्रति.
5) जन्म दिन प्रमाण पत्र की 1 प्रति
6) आवास प्रमाण पत्र की 1 प्रति.
7) 6 रंगीन पासपोर्ट चित्र तथा 6 स्टाम्प आकार चित्र.
8) रुपये 5,000 का डिमांड ड्राफ्ट (बैंक मांग पत्र) जो की निम्न पते पर जरी हो.
9) शेष राशि कक्षा प्रारंभ होने से पूर्व डिमांड ड्राफ्ट बनवा कर जमा कराएँ.



नामांकन पत्र कहाँ भेजें ?





आवेदकों के लिए जानने युक्त जानकारी

नामांकन के बाद पढाई के लिए चार प्रायोगिक कक्षा के सेमिनार जो की क्रम से 5, 5, 3 और 7 दिनों के होंगे में सभी में भाग लेना आवश्यक होगा. पहले के दो सेमिनार विस्तार केन्द्रों पर होगी. तीसर सेमिनार भारत भर के सभी विस्तार केन्द्रों (गुरुकुलों) के विद्यार्थियों का सामूहिक रूप से अलग – अलग प्रदेशों में (स्थानों) आयोजित की जाती है. चतुर्थ सेमिनार जिसके साथ परीक्षा भी होती है वह कांचीपुरम स्थित विद्यापीठम के परिसर में होगी.

कुल 160 घंटे की पढाई / प्रक्टिकल्स होगी. इसमें कुल मिला कर लगभग 1 वर्ष का समय लगता है.

उतीर्ण विद्यार्थी ”गव्यसिद्ध” कहलायेंगे. जिनके लिए दीक्षांत समारोह “पंचगव्य डॉक्टर असोसिएशन” भारत के किसी भी राज्य में आयोजित करेगा. जहाँ ”गव्यसिद्धों” को दीक्षांत किया जायेगा.

गव्यसिद्धों को अपने मरीजों के लिए पंचगव्य की औषधियों के निर्माण का पूर्ण अधिकार होगा.

इसके बाद गव्यसिद्धों को 2 वर्ष तक चिकित्सा अभ्याश विद्यापीठम के किसी आचार्य के सानिध्य में करना होता है. इसके लिए गव्यसिद्ध अपने गृह क्षेत्र में ही रह कर ऑनलाइन व्यवस्था के तहद विद्यापीठम के आचार्य के सानिध्य में चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. 2 वर्ष के चिकित्सा अभ्याश पूरा होने के बाद पूर्ण गव्यसिद्ध कहलायेंगे और उन्हें पंचगव्य विद्यापीठम की ओर से अभ्यास पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा. गव्यसिद्ध यदि प्रोफेशनल रूप में मेडिकल अभ्याश करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन करा कर विश्व में कहीं भी चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. (जिन देशों में भारत की शिक्षा को मान्यता प्राप्त है.) और अपने नाम के साथ गव्यसिद्ध डॉक्टर भी लिख सकते हैं. जैसे ”गव्यसिद्ध डॉ निरंजन भाई वर्मा”

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