एडवांस डिप्लोमा इन पंचगव्य थेरेपी (MD Panchgavya)

गव्यसिद्ध डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों से भिन्न हैं क्योंकि गव्यसिद्ध डॉक्टर केवल बिमारियों के लिए ही चिकित्सा सेवा प्रदान नहीं करते बल्कि रोगियों के कल्याण एवं उनकी मनः स्थिति को धयान में रखते हुए उच्चतम जीवन शैली की परिकल्पना के साथ बिना भेद – भाव के सेवाएं प्रदान करते हैं.

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"एडवांस डिप्लोमा इन पंचगव्य थेरेपी" (ADPT - MD Panchgavya)


About this Course :

आवेदकों के लिए जानने युक्त जानकारी

नामांकन (Admission Form) के बाद पढाई के लिए चार प्रायोगिक कक्षा के सेमिनार जो की क्रम से 5, 5, 3 और 7 दिनों के होंगे में सभी में भाग लेना आवश्यक होगा. पहले के दो सेमिनार विस्तार केन्द्रों पर होगी. तीसर सेमिनार भारत भर के सभी विस्तार केन्द्रों (गुरुकुलों) के विद्यार्थियों का सामूहिक रूप से अलग – अलग प्रदेशों में (स्थानों) आयोजित की जाती है. चतुर्थ सेमिनार जिसके साथ परीक्षा भी होती है वह कांचीपुरम स्थित विद्यापीठम के परिसर में होगी.


  • कुल 160 घंटे की पढाई / प्रक्टिकल्स होगी. इसमें कुल मिला कर लगभग 1 वर्ष का समय लगता है.
  • उतीर्ण विद्यार्थी ”गव्यसिद्ध” कहलायेंगे. जिनके लिए दीक्षांत समारोह “पंचगव्य डॉक्टर असोसिएशन” भारत के किसी भी राज्य में आयोजित करेगा. जहाँ ”गव्यसिद्धों” को दीक्षांत किया जायेगा.
  • गव्यसिद्धों को अपने मरीजों के लिए पंचगव्य की औषधियों के निर्माण का पूर्ण अधिकार होगा.

इसके बाद गव्यसिद्धों को 2 वर्ष तक चिकित्सा अभ्याश विद्यापीठम के किसी आचार्य के सानिध्य में करना होता है. इसके लिए गव्यसिद्ध अपने गृह क्षेत्र में ही रह कर ऑनलाइन व्यवस्था के तहद विद्यापीठम के आचार्य के सानिध्य में चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. 2 वर्ष के चिकित्सा अभ्याश पूरा होने के बाद पूर्ण गव्यसिद्ध कहलायेंगे और उन्हें पंचगव्य विद्यापीठम की ओर से अभ्यास पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा. गव्यसिद्ध यदि प्रोफेशनल रूप में मेडिकल अभ्याश करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन करा कर विश्व में कहीं भी चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. (जिन देशों में भारत की शिक्षा को मान्यता प्राप्त है.) और अपने नाम के साथ गव्यसिद्ध डॉक्टर भी लिख सकते हैं. जैसे ”गव्यसिद्ध डॉ निरंजन भाई वर्मा”

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पाठ्यक्रम (Syllabus)

पंचगव्य परिचय 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 - ज्ञानकोष + 40 पंचगव्य प्रशिक्षण केन्द्रों पर गोसेवा कार्य

शामिल विषय (Topics):
  • 1 गऊमाता एवं उनके गव्यों का उद्भव।
  • 2 मनुष्य जीवन और उसके उद्देश्य।
  • 3 गऊमाता एवं गव्य पुराण।
  • 4 गव्यों के प्रकार।
  • 5 गऊमाता के प्रकार।
  • 6 विभिन्न प्रकार के गऊमाताओं के गव्यों के प्रकार।
  • 7 गऊमाता एवं काऊ में अंतर।
  • 8 गव्यों के संग्रह के लिए गऊमाताओं का प्रशिक्षण। - प्रयोगिक कक्षा
  • 9 गव्यों के संग्रह के लिए ग्रह और उपग्रहों की स्थिति।
  • 10 श्रेष्ठ गव्य संग्रह के लिए गऊमाता को जैविक चारा।
  • 11 गऊमाता के शरीर में ऊर्जा संग्रह का विज्ञान।
आप क्या सीखेंगे (What You'll Learn):
  • भारतीय पौराणिक तकनीकी ज्ञान
  • आइये ! साथ मिल कर बढ़ें !
  • Register Now - Online Admissions are Open

पंचगव्य का औषध के रूप में निर्माण 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 - औषध निर्माण के नमूने + 40 अपने घर की गोमाता की सेवा की

शामिल विषय (Topics):
  • 1 गव्यों का संग्रह कैसे करें। - प्रयोगिक कक्षा
  • 2 गव्यों का रख – रखाव। - प्रयोगिक कक्षा
  • 3 गव्यों में जलिय अंश की व्याख्या। ♦ दूध ♦ गौमूत्र ♦ गोबर (गोमय) ♦ मट्ठा ♦ घी
  • 4 गव्यों में छारीय अंश की व्याख्या। ♦ दूध ♦ गौमूत्र ♦ गोबर (गोमय) ♦ मट्ठा ♦ घी
  • 5 गव्यों के साथ जड़ी- बूटियों का मिश्रण। - प्रयोगिक कक्षा
  • 6 गौमूत्र के वाष्पिकरण की विधियां। - प्रयोगिक कक्षा
  • 7 गौमूत्र छार से विभिन्न प्रकार की घनवटियों का निर्माण। - प्रयोगिक कक्षा
  • 8 गौमूत्र छार से मलहम का निर्माण। - प्रयोगिक कक्षा
  • 9 अम्लिय विधि से गौमूत्र औषध का निर्माण। - प्रयोगिक कक्षा
  • 10 छिड़कने योग्य पंचगव्य औषध का निर्माण। - प्रयोगिक कक्षा
  • 11 चूर्ण रूप में पंचगव्य औषध का निर्माण। - प्रयोगिक कक्षा
परियोजना :

आप अभ्यास करेंगे

आप क्या सीखेंगे (What You'll Learn):
  • भारतीय पौराणिक तकनीकी ज्ञान
  • आइये ! साथ मिल कर बढ़ें !
  • Register Now - Online Admissions are Open

पंचगव्य का औषधिये  उपयोग 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 - महासम्मेलन में उपस्तिथि + 40 - अपने जिला की गोशाला में गोसेवा

शामिल विषय (Topics):
  • 1 मानव शरीर रचना विज्ञान।
  • 2 मानव शरीर क्रिया विज्ञान।
  • 3 मानव शरीर में रोगों की पहचान।
  • 4 नाडी विज्ञान का परिचय।
  • 5 नाडी विज्ञान में अभ्यास। - प्रयोगिक कक्षा
  • 6 नाभि विज्ञान का परिचय। 
  • 7 नाभि विज्ञान में अभ्यास। - प्रयोगिक कक्षा
  • 8 शाकाहार जीवन की श्रेष्ठता।
  • 9 कफ रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 10 पित्त रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 11 वात्त रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 12 संक्रामक रोगों की चिकित्सा।
  • 13 नर-नारी प्रजनन तंत्र के रोग और पंचगव्य से उपचार।
  • 14 बच्चों के रोगों के लिए पंचगव्य।
  • 15 पंचगव्य दिनचर्या के उत्पाद एवं सौंदर्य प्रसाधन। - प्रयोगिक कक्षा
संकाय और विशेषज्ञ :
  • गव्यसिद्धाचार्य निरंजन वर्मा - गुरुकुलपति, पंचगव्य गुरूकुलम

गौशाला रख-रखाव, प्रबंधन एवं शोध 

थ्योरी 100 अंक + प्रैक्टिकल 100 अंक = 200 अंक
प्रैक्टिकल 100 अंक = 60 मोखिक प्रश्न + 40 महासम्मेलन की कक्षा में उपस्थिती
 नोट – उतीर्ण होने के लिए आवश्यक अंक 50 प्रतिशत

शामिल विषय (Topics):
  • 1 गौशाला वास्तु एवं निर्माण कला।
  • 2 जैविक चारागाह प्रबंधन।
  • 3 दूध संग्रह एवं प्रबंधन।
  • 4 गौमूत्र संग्रह एवं प्रबंधन।
  • 5 गोमय संग्रह एवं प्रबंधन।
  • 6 गऊमाता की चिकित्सा। - प्रयोगिक कक्षा
  • 7 लघु गौशालाओं का प्रबंधन।
  • 8 मध्यम गौशालाओं का प्रबंधन।
  • 9 वृहद गौशालाओं का प्रबंधन।
  • 10 जैविक चारा संग्रह तकनीक। - प्रयोगिक कक्षा
  • 11 जैविक चारा उत्पादन तकनीक। - प्रयोगिक कक्षा
  • 12 जैविक खाद का निर्माण एवं प्रबंधन। - प्रयोगिक कक्षा
  • 13 जैविक कीट खदेडक निर्माण एवं प्रबंधन। - प्रयोगिक कक्षा
  • 14 पंचगव्य उत्पादों की पैकेजिंग। - प्रयोगिक कक्षा
  • 15 गौसेवक एवं गौशाला कार्यालय का प्रबंधन।
  • 16 गौशाला अभिलेख रक्षण। - प्रयोगिक कक्षा
संकाय और विशेषज्ञ :
  • गव्यसिद्धाचार्य निरंजन वर्मा - गुरुकुलपति, पंचगव्य गुरूकुलम

तृतीय सेमिनार (तीन-चार दिनों का) 

पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन - जिसमें सभी विद्यापीठम विस्तार केन्द्रों के शिष्य / शिष्या एक साथ कक्षा में भाग लेते हैं। यह सम्मलेन प्रतिवर्ष भारत राज्य के अलग - अलग प्रदेशों में काल भैरव अष्टमी (नवम्बर) के दिन (अमर बलिदानी राजीव भाई दिक्षित के भारतीय तिथि के अनुसार जन्म / पुण्य तिथि) पर आयोजित किये जाते हैं.

नोट (Note):

    वर्ष 2018 - कालड़ी (केरल) 28 नवंबर से 30 नवंबर तक।
    प्रथम दिवस - शरीर में वीर्य / शुक्र उत्पत्ति की क्रिया और उसका संरक्षण 
    द्वितीय दिवस - सृष्टि निर्माण को समझें क्वांटम फिजिक्स से. 
    तृतीय दिवस - लुप्त हो रही गोमाता के गव्यों से अद्भूत चिकित्सा.

चतुर्थ (परीक्षा) सेमिनार (सात दिनों का) 

प्रतिवर्ष अप्रैल और दिसंबर में निश्चित 

  • 1 पूर्व के विषयों का पुनरशिक्षण
  • 2 मस्तिष्क - बनावट, क्रिया प्रणाली और रोग.
  • 3 अधिक संक्रामक रोग और उसका निवारण.
  • 4 नारी प्रजनन तंत्र और रोग निवारण.
  • 5 नर  प्रजनन तंत्र और रोग निवारण.
  • 6 मानव शरीर में उर्जा और उसका कार्य प्रणाली
  • 7.नाडी - नाभि पर उच्चत्तर शिक्षा


    नोट -
  • 1) चारों विषयों की शिक्षा गुरूकुलम विस्तार केन्द्रों पर 5-5 दिनों के 2 सेमिनारों में पूर्ण किया जायेगा.
  • 2) 3 सरा सेमिनार जिसमें नए - पुराने सभी गव्यसिद्धर उपस्थित रहते हैं, उसमें पूर्व के विषय जो पाठ्यक्रम में नहीं है, उसकी शिक्षा दी जाती है.
  • 3) 3 सरा सेमिनार में नए शोध के विषयों पर गुरूजी का उद्बोदन एवं मार्गदर्शन रहता है. 
  • 4) पिछले वर्ष के सभी शिष्यों का दीक्षांत समारोह होता है.  

दिनचर्या (How It Works)

7 दिनों के सत्र में 6 विषयों पर उच्चत्तर शिक्षा. 

दिनचर्या इस प्रकार होगी –

  • (क) प्रात: 4 बजे से पंचमहाभूत पूजा।
  • (ख) 4.30 बजे से 7.30 तक प्रात: कक्षा, इसके बाद अल्पाहार - मोटे अनाज का दलिया।
  • (ग) 9 से 12 बजे परीक्षा, इसके बाद भोजन - चावल, दाल/कड़ी, सब्जी आदि।
  • (घ) 2 बजे से 5 बजे तक प्रायोगिक परीक्षा, इसके बाद सायं भोजन।
  • (च) रात्रि "रिविजन" कक्षा 7 बजे से 9 बजे रात्रि तक।

गव्यसिद्धाचार्य (Gavyasiddh)

गव्यसिद्धाचार्य निरंजन वर्मा

गुरुकुलपति, पंचगव्य गुरूकुलम

प्रश्न एवं उत्तर (Faqs)

Course Duration

22 Days in a year

@ Gurukulam

Timings

4:30am - 9:00pm

Per Day

Price

₹ 35,000

(INR - Only)

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