गव्यसिद्ध डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों से भिन्न हैं:

गव्यसिद्ध डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों से भिन्न हैं क्योंकि गव्यसिद्ध डॉक्टर केवल बिमारियों के लिए ही चिकित्सा सेवा प्रदान नहीं करते बल्कि रोगियों के कल्याण एवं उनकी मनः स्थिति को धयान में रखते हुए उच्चतम जीवन शैली की परिकल्पना के साथ बिना भेद – भाव के सेवाएं प्रदान करते हैं.

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नामांकन से सम्बंधित जानकारी :


Admission Information:

आवेदकों के लिए जानने युक्त जानकारी

पंचगव्य चिकित्सा शिक्षा में नामांकन करने के लिए मार्गदर्शन
1) सर्वप्रथम भाषा का चुनाव करें. उसी आधार पर उस प्रदेश के गुरुकुल का चुनाव करें॰ पंचगव्य विद्यापीठम (पंचगव्य गुरूकुलम समूह की इकाई) भारत की सभी राष्ट्रभाषाओं में पंचगव्य चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध करता है.
2) पंचगव्य विद्यापीठम विस्तार का चुनाव करें. कई प्रदेशों में एक से अधिक विस्तार केंद्र हैं. अत: इसे कई आधारों पर चुना जा सकता है.
पंचगव्य विद्यापीठम विस्तार
a. आचार्यों के आधार पर.
b. संचालकों के आधार पर.
नामांकन कराने के लिए आवेदन अपनी मातृभाषा के साथ – साथ अंगरेजी और हिन्दी में भी भरना आवश्यक है.. 
1) ऑनलाइन नामांकन कैसे करें?
2) विस्तार केन्द्रों पर जाकर नामांकन कैसे करें.

Terms & Conditions

Panchgavya Vidyapeetham (पंचगव्य विद्यापीठम ):

  • 1. छात्रों द्वारा किसी भी प्रकार के यात्रा खर्च सहनशील होंगे
  • 2. लॉजिंग सुविधाएं गुरुकुल प्रकार छात्रावास होगी
  • 3. खाद्य पदार्थ केवल कार्बनिक और शाकाहारी के रूप में संभव होगा
  • 4. मांसाहारी भोजन, पैक किए गए भोजन, कूल पेय और किसी भी प्रकार के धूम्रपान, नशीली दवाओं और शराब पीने का उपयोग पाठ्यक्रम के दौरान सख्ती से प्रतिबंधित है, प्रशिक्षण शिविर और परिसर क्षेत्र
  • 5. पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण शिविर के दौरान मोबाइल, कैमरा, लैपटॉप और किसी अन्य प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकता है
  • 6. प्रशिक्षण शिविर और पाठ्यक्रम में शामिल होने से पहले आपको अपने सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जमा करना होगा
  • 7. किसी भी प्रकार का अयोग्य या अस्वास्थ्यकर व्यक्ति इस कोर्स और प्रशिक्षण शिविर के लिए योग्य नहीं होगा
  • 8. किसी भी मामले में उम्मीदवार अपने रिश्तेदारों और बच्चों को पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण शिविर नहीं ला सकते हैं
  • 9. कृपया अपने साथ ज्वैलर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इत्यादि जैसी किसी भी प्रकार की मूल्यवान वस्तुएं न लें
  • 10. आपको गुरुकुल के दीनचर्य का कड़ाई से पालन करना होगा
  • 11. उम्मीदवारों को सरल भारतीय भोजन प्रदान किया जाएगा
  • 12. किसी भी तरह की चोट, दुर्घटना या मृत्यु उम्मीदवार के मामले में खुद जिम्मेदार है। बीमा और क्षति का दावा नहीं किया जा सकता है
  • 13. यदि किसी भी उम्मीदवार ने गुरुकुल नियमों का उल्लंघन किया है या चोरी की तरह कोई अवैध गतिविधि कर रही है, महिला उम्मीदवारों को चिढ़ाते हुए, तुरंत खारिज कर दिया जाएगा और पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण शिविर से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा
  • 14. ड्रेस कोड के लिए केवल भारतीय जातीय पहनने की अनुमति है। जींस, स्कर्ट, छोटे पहनने आदि जैसे पश्चिमी कपड़े निषिद्ध हैं
  • 15. यदि आवश्यक हो तो पंचगव्य गुरुकुल के पास किसी भी नियम और विनियमन को संशोधित करने के लिए सभी अधिकार सुरक्षित हैं
  • 16. किसी भी मामले में क्षेत्राधिकार क्षेत्र केवल मदुरै है

आवेदकों के लिए जानने युक्त जानकारी

Panchgavya Vidyapeetham (पंचगव्य विद्यापीठम ):

नामांकन के बाद पढाई के लिए चार प्रायोगिक कक्षा के सेमिनार जो की क्रम से 5, 5, 3 और 7 दिनों के होंगे में सभी में भाग लेना आवश्यक होगा. पहले के दो सेमिनार विस्तार केन्द्रों पर होगी. तीसर सेमिनार भारत भर के सभी विस्तार केन्द्रों (गुरुकुलों) के विद्यार्थियों का सामूहिक रूप से अलग – अलग प्रदेशों में (स्थानों) आयोजित की जाती है. चतुर्थ सेमिनार जिसके साथ परीक्षा भी होती है वह कांचीपुरम स्थित विद्यापीठम के परिसर में होगी.

कुल 160 घंटे की पढाई / प्रक्टिकल्स होगी. इसमें कुल मिला कर लगभग 1 वर्ष का समय लगता है.

उतीर्ण विद्यार्थी ”गव्यसिद्ध” कहलायेंगे. जिनके लिए दीक्षांत समारोह “पंचगव्य डॉक्टर असोसिएशन” भारत के किसी भी राज्य में आयोजित करेगा. जहाँ ”गव्यसिद्धों” को दीक्षांत किया जायेगा.

गव्यसिद्धों को अपने मरीजों के लिए पंचगव्य की औषधियों के निर्माण का पूर्ण अधिकार होगा.

इसके बाद गव्यसिद्धों को 2 वर्ष तक चिकित्सा अभ्याश विद्यापीठम के किसी आचार्य के सानिध्य में करना होता है. इसके लिए गव्यसिद्ध अपने गृह क्षेत्र में ही रह कर ऑनलाइन व्यवस्था के तहद विद्यापीठम के आचार्य के सानिध्य में चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. 2 वर्ष के चिकित्सा अभ्याश पूरा होने के बाद पूर्ण गव्यसिद्ध कहलायेंगे और उन्हें पंचगव्य विद्यापीठम की ओर से अभ्यास पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा. गव्यसिद्ध यदि प्रोफेशनल रूप में मेडिकल अभ्याश करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन करा कर विश्व में कहीं भी चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. (जिन देशों में भारत की शिक्षा को मान्यता प्राप्त है.) और अपने नाम के साथ गव्यसिद्ध डॉक्टर भी लिख सकते हैं. जैसे ”गव्यसिद्ध डॉ निरंजन भाई वर्मा”

गव्यसिद्धाचार्य (Gavyasiddh)

सेवारत्न गव्यसिद्धाचार्य 

डॉक्टर निरंजन भाई वर्मा
अभियांत्रिकी, स्नातक (गणित)
एम.ए.(अपभ्रंश), एम.डी.(पंचगव्य), एम.डी.(सेल थेरेपी), एडवांस आयुर्वेदिक थेरेपिस्ट (तमिलनाडु सरकार), एफ.आर.एच.एस., एफ.डब्लू.एस.ए.एम.

प्रश्न एवं उत्तर (Faqs)

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