पंचगव्य विद्यापीठम

हमारा नारा

1) गोमाता से निरोगी भारत
2) गोमाता से असाध्य नहीं कोई रोग.

हमारा लक्ष्य

भारत के सभी जिलों में पंचगव्य चिकित्सा केंद्र एवं पंचगव्य चिकित्सा शिक्षा की उपलब्धता.

आइये ! साथ मिल कर बढ़ें ! आइये ! राष्ट्र निर्माण के इस यज्ञ में साथ आइये ! पंचगव्य विद्यापीठम एक शैक्षणिक आन्दोलन है, भारतीय चिकित्सा विधा को भारत में फिर से स्थापित करने के लिए. पंचगव्य विद्यापीठम के प्रयास से लुप्त हो गयी “नाडी और नाभि विज्ञान” फिर से पुनर्जीवित हो रही है. गौमाता के गव्यों (गोमय, गोमूत्र, क्षीर, दधी, मक्खन, छाछ, घी, भस्म, गोस्पर्श) से भारत की अर्थव्यवस्थता ऊंची उठेगी – भारत समृद्ध बनेगा। भारत के लोगों का स्वास्थ्य सुधरेगा – भारत में श्रम बढ़ेगा। गव्यों के सेवन से युवा पीढ़ी का मन बदलेगा – राष्ट्रियता कूट-कूट कर भरेगी। भारतीय कृषि नैसर्गिक होगी – देसी बीज बचेगा, उत्पादन बढ़ेगा। भारत भूमि में जिस दिन फिर से 100 करोड़ गोमाता हो गयी – फिर से श्रीरामचन्द्र, श्रीकृष्णचन्द्र जैसे पुरुषोत्तम, महानतम योद्धा पैदा लेकर सृष्टि का उद्धार करेंगे। इसलिए गोमाता को उपयोगी, लाभकारी बनाकर उसकी रक्षा करने की भूमिका में आयें।

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TESTIMONIALS

आइये ! राष्ट्र निर्माण के इस यज्ञ में साथ मिल कर बढ़ें !

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    श्री हरेश भाई शाह

    पंचगव्य से अपना उपचार करवाने के मात्र 6 माह के भीतर ही उनका पूरा एक्जिमा जड़ से ठीक हो गया और उसका निशान भी पूरी तरह से खत्म हो गया|

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    श्री चंदूलाल पटेल

    इस पंचगव्य चिकित्सा पद्धति का अपने संपर्क में आने वाले रोगियों के बीच प्रचार करके उनका जीवन भी बचा रहे है|

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    श्री नारायण स्वामी

    गौशाला आए और अपना उपचार पंचगव्य से लेने का अनुरोध किया| उपचार शुरू करने के मात्र 3 दिन के भीतर ही इन्हे नींद आने लगी और 15 दिन में 5-6 घंटे सोने लगे तथा कब्ज भी ठीक हो गया

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    श्रीमती गुणवंती देवी

    गौशाला में ही रहकर अपना उपचार पंचगव्य से करवाना चाहा| 15 दिन गौशाला में रहने के बाद मात्र कुल 1 माह में पूरी तरह से स्वस्थ होकर अब अपना जीवन सुखमय तरीके से व्यतीत कर रही है|

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    श्री बी.के. मूर्ति

    चेन्नई के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट जो किडनी के कैंसर से पीड़ित थे, पंचगव्य से चिकित्सा लेने के बाद वे अब पूरी तरह से स्वस्थ है

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