₹36,000
15

Course Features

  • Lectures 4
  • Quizzes 0
  • Duration 180 hour
  • Skill level Entry Level
  • Language Hindi
  • Students 15
  • Assessments Self
,

Categorires

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15 students

यह एडवांस डिप्लोमा इन पंचगव्य थेरेपी पाठ्यक्रम है। यह प्राथमिक पाठ्यक्रम है। इसे पूरा करने के बाद ही दूसरे पाठ्यक्रम में नामांकन हो सकेगा। इसके लिए योग्यता 10 वीं या 12 वीं है। इस के लिए वर्ष में 2 बार नामांकन होता है। जनवरी से मार्च तक और मई से जुलाई तक।
यह 1 वर्ष का है जिसमें कुल 20 दिन की कक्षा होती है शेष घर पर ही पढ़ना होता है। सभी कक्षाएं 4 सत्र में होती है। 5+5+3+7 दिन।

आवेदकों के लिए जानने युक्त जानकारी
नामांकन (Admission Form) के बाद पढाई के लिए चार प्रायोगिक कक्षा के सेमिनार जो की क्रम से 5, 5, 3 और 7 दिनों के होंगे में सभी में भाग लेना आवश्यक होगा. पहले के दो सेमिनार विस्तार केन्द्रों पर होगी. तीसर सेमिनार भारत भर के सभी विस्तार केन्द्रों (गुरुकुलों) के विद्यार्थियों का सामूहिक रूप से अलग – अलग प्रदेशों में (स्थानों) आयोजित की जाती है. चतुर्थ सेमिनार जिसके साथ परीक्षा भी होती है वह कांचीपुरम स्थित विद्यापीठम के परिसर में होगी.

  • कुल 160 घंटे की पढाई / प्रक्टिकल्स होगी. इसमें कुल मिला कर लगभग 1 वर्ष का समय लगता है.
  • उतीर्ण विद्यार्थी ”गव्यसिद्ध” कहलायेंगे. जिनके लिए दीक्षांत समारोह “पंचगव्य डॉक्टर असोसिएशन” भारत के किसी भी राज्य में आयोजित करेगा. जहाँ ”गव्यसिद्धों” को दीक्षांत किया जायेगा.
  • गव्यसिद्धों को अपने मरीजों के लिए पंचगव्य की औषधियों के निर्माण का पूर्ण अधिकार होगा.

इसके बाद गव्यसिद्धों को 2 वर्ष तक चिकित्सा अभ्याश विद्यापीठम के किसी आचार्य के सानिध्य में करना होता है. इसके लिए गव्यसिद्ध अपने गृह क्षेत्र में ही रह कर ऑनलाइन व्यवस्था के तहद विद्यापीठम के आचार्य के सानिध्य में चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. 2 वर्ष के चिकित्सा अभ्याश पूरा होने के बाद पूर्ण गव्यसिद्ध कहलायेंगे और उन्हें पंचगव्य विद्यापीठम की ओर से अभ्यास पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा. गव्यसिद्ध यदि प्रोफेशनल रूप में मेडिकल अभ्याश करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन करा कर विश्व में कहीं भी चिकित्सा अभ्याश कर सकते हैं. (जिन देशों में भारत की शिक्षा को मान्यता प्राप्त है.) और अपने नाम के साथ गव्यसिद्ध डॉक्टर भी लिख सकते हैं. जैसे ”गव्यसिद्ध डॉ निरंजन भाई वर्मा”

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पंचगव्य विद्यापीठम. भारतीय पौराणिक तकनीकी ज्ञान को समर्पित गुरुकुलीय विश्वविद्यालय. हमारा नारा: 1) गोमाता से निरोगी भारत 2) गोमाता से असाध्य नहीं कोई रोग. हमारा लक्ष्य: भारत के सभी जिलों में पंचगव्य चिकित्सा केंद्र एवं पंचगव्य चिकित्सा शिक्षा की उपलब्धता. आइये ! साथ मिल कर बढ़ें ! आइये ! राष्ट्र निर्माण के इस यज्ञ में साथ आइये ! पंचगव्य विद्यापीठम एक शैक्षणिक आन्दोलन है, भारतीय चिकित्सा विधा को भारत में फिर से स्थापित करने के लिए. पंचगव्य विद्यापीठम के प्रयास से लुप्त हो गयी "नाडी और नाभि विज्ञान" फिर से पुनर्जीवित हो रही है. गौमाता के गव्यों (गोमय, गोमूत्र, क्षीर, दधी, मक्खन, छाछ, घी, भस्म, गोस्पर्श) से भारत की अर्थव्यवस्थता ऊंची उठेगी – भारत समृद्ध बनेगा। भारत के लोगों का स्वास्थ्य सुधरेगा – भारत में श्रम बढ़ेगा। गव्यों के सेवन से युवा पीढ़ी का मन बदलेगा – राष्ट्रियता कूट-कूट कर भरेगी। भारतीय कृषि नैसर्गिक होगी – देसी बीज बचेगा, उत्पादन बढ़ेगा।

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